World Post Day: वो कौन सी जगह है, जहां से चिट्ठी भेजने पर पहुंचने में लगता है 1 साल
वियतनाम में दुनिया का सबसे खूबसूरत पोस्ट ऑफिस है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी आते हैं.आज 9 अक्टूबर को वर्ल्ड पोस्ट डे (World Post Day) है. साल 1874 में आज ही के दिन यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन बनाए जाने के लिए 22 देशों ने अपनी सहमति दी थी. सालों बाद 1969 में जापान के टोक्यो में एक आयोजन में आज ही के दिन को विश्व डाक दिवस के तौर पर मनाने का फैसला लिया गया. इसका मकसद था- नागरिकों को डाक सर्विस से जोड़ना और उनमें इसके लिए जागरुकता लाना.
अब दुनिया के 142 देशों में पोस्टल कोड है जो कि यूनिवर्सल पोस्टल सेवा के तहत आता है. भारत में पिनकोड नंबर के आधार पर चिट्ठियां बांटी जाती हैं. पिनकोड तय किए जाने की शुरुआत 15 अगस्त, 1972 में हुई थी. पिन की पहली संख्या क्षेत्र, दूसरी सब डिवीजन, तीसरी संख्या से जिले का पता चलता है. आखिरी डिजिट से से ये पता लगता है कि चिट्ठी जिले के किस पोस्ट ऑफिस में जाने वाली है.
भारत में दुनिया की सबसे बड़ी पोस्टल सर्विस है. यहां डेढ़ लाख से भी ज्यादा पोस्ट ऑफिस देश के कोने -कोने में हैं. भारतीय डाक (department of posts ministry of communications) के अनुसार एक पोस्ट ऑफिस से गभग 7 हजार लोगों को सेवाएं मिलती हैं. वहीं 83% अंतरराष्ट्रीय डाक लगभग 5 दिनों के भीतर अपने गंतव्य तक पहुंचा दी जाती है. भारत में अलग-अलग मौकों पर डाक विभाग अलग तरह की सुविधाएं भी देता है, जैसे त्यौहारों पर किसी आपदा की स्थिति में डाक विभाग की खास सर्विस चलाई जाती है ताकि डाक का जल्दी से जल्दी पहुंचना सुनिश्चित हो सके.
पोस्ट ऑफिस केवल पुरानी इमारतों और लाल डिब्बों वाले नहीं, कई पोस्ट ऑफिस अपने अनोखेपन के चलते टूरिस्ट स्पॉट भी बन चुके हैं. जैसे कश्मीर में एक तैरने वाला यानि फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस है जो कि एक हाउसबोट में बना हुआ है. ये कश्मीर की डल झील में स्थित है और यहां पर किसी भी दूसरे पोस्ट ऑफिस की तरह ही काम होता है. इस डाकखाने का नाम पहले नेहरू पार्क पोस्ट ऑफिस था, जो साल 2011 में फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस से बदल दिया गया. साल 2014 की बाढ़ में पोस्ट ऑफिस बहने लगा था, जब सेना के जवानों ने उसे बांधकर रखा. जनजीवन सामान्य होने के बाद तैरने वाला पोस्ट ऑफिस दोबारा काम करने लगा.
इसी तरह से वियतनाम में दुनिया का सबसे खूबसूरत पोस्ट ऑफिस है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी आते हैं. इसे साइगॉन सेंट्रल पोस्ट ऑफिस कहते हैं. वियतनाम के हो ची मिन्ह (Ho Chi Minh) शहर में इस डाकघर को साल 1886 में फ्रेंच आर्किटेक्ट गुस्ताव एफिल (Gustave Eiffel) ने बनाया था. ये फ्रांसीसी वास्तुविद वही हैं, जिन्होंने स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी और आइफिल टावर का डिजाइन तैयार किया था. इस पोस्ट ऑफिस को बनाने में तीन साल लगे. यूरोपियन रेलवे स्टेशन की तर्ज पर इसे बनाया गया है. यहां दीवारों पर नक्काशी है और बहुत ही बड़े-बड़े झरोखे हैं. यहां जगह-जगह टेलीफोन भी लगे हुए हैं ताकि सैलानी इत्मीनान से अपने दोस्तों और घरवालों को फोन कर सकें.
Republic of Vanuatu का पोस्ट ऑफिस सबसे बढ़कर है. ये पानी के भीतर स्थित है. ग्राउंड लेवल से 9 फीट नीचे बसे इस पोस्ट ऑफिस में मछलियों के बीच एक पोस्ट बॉक्स है जो वॉटरपूफ्र है ताकि चिट्ठियां गीली न हों और सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच सकें. इस देश में तैराकी पसंद करने वाले लोग इतने ज्यादा हैं कि हर थोड़े दिनों में बक्सा भर जाता है. यही वजह है कि देश की सरकार चिट्ठियां पोस्ट करने को एक एडवेंचर एक्टिविटी की तरह बढ़ावा दे रही है. स्कूबा डाइविंग के शौकीन यहां खासतौर पर आते और खत डालते हैं.
ऐसे ही दुनिया की सबसे उजाड़ और ठंडी जगह अंटाकर्टिका में भी एक पोस्ट ऑफिस है, जिसे Port Lockroy के नाम से जाना जाता है. इसका एक हिस्सा म्यूजियम की तरह भी काम करता है. यहां से दुनिया के किसी भी हिस्से में एक चिट्ठी पहुंचाने की कीमत है 1 डॉलर और इसे पहुंचने में दो हफ्ते से लेकर 1 साल तक कितना भी वक्त लग सकता है. ये इसपर निर्भर करता है कि आपने किस मौसम में चिट्ठी पोस्ट की है.
World Post Day: वो कौन सी जगह है, जहां से चिट्ठी भेजने पर पहुंचने में लगता है 1 साल
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Thursday, October 10, 2019
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