इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने 2,50,000 डाकियों को कस्टमर्स के घर जाकर बैंकिंग सेवा देने के लिए प्रशिक्षित करने के अलावा इनमें 20,000 डाकियों को स्मार्टफोन और बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट रीडर दिए गए है, हालांकि टेक्नॉलजी और लोगों से जुड़ने के मोर्चे पर अभी काफी काम करना होगा
हाइलाइट्स
- इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने 2,50,000 डाकियों को बैंकिंग सेवा का दिया प्रशिक्षण
- इनमें 20,000 डाकियों को स्मार्टफोन और बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट रीडर दिए गए
- इंडिया पोस्ट के ग्रामीण डाक सेवक और डाकिये लोगों से संपर्क का जरिया बनेंगे
- आईपीपीबी के मुख्य कार्याकारी सुरेश सेठी इसे मानते हैं स्वतंत्र और नए जमाने का बैंक
शहरी इलाकों के डाकघरों में मौजूद इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की शाखाएं काफी हद तक पूछताछ केंद्र की तरह काम करती दिखती हैं, न कि किसी व्यस्त बैंक की तरह। कभी-कभार आने वाले लोग आईपीपीबी अकाउंट्स खोलने के बारे में पूछते हैं। उन्हें एसी कमरे में ले जाया जाता है, जहां आईपीपीबी के युवा अधिकारी उन्हें जानकारी देते हैं।
इंडिया पोस्ट से बेहतर है स्थिति
आईपीपीबी की यह 'अच्छे संसाधन' वाली कामकाजी स्थिति इंडिया पोस्ट की हालत से काफी अलग है। यह बात नेशनल फेडरेशन ऑफ पोस्टल एंप्लॉयीज के सेक्रेटरी जनरल आर. एन. पराशर को चुभती है। पराशर ने कहा, 'ये अधिकारी डेप्युटेशन पर हैं। इनमें से ज्यादातर सरकारी बैंकों से आए हैं। उन्हें उनकी सैलरी के अलावा 20,000-25,000 रुपये तक मिल जाते हैं। वे एसी ऑफिस में बैठते हैं और कोई काम नहीं करते।' उन्होंने कहा, 'हम आईपीपीबी से खुश नहीं हैं। अगर बैंक ही शुरू करना था तो अपने दम पर यह काम करना चाहिए था। हमारे लोगों और हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर का सहारा नहीं लेना चाहिए था। उन्हें तो हमें किराया और बिजली के खर्च का भुगतान करना चाहिए।''स्वतंत्र और नए जमाने का बैंक'
साफ है कि 165 साल पुराने इंडिया पोस्ट के मुख्यालय डाक भवन के टॉप अधिकारियों जैसी राय कर्मचारी संघों की नहीं है। यह असंतोष आईपीपीबी की ग्रोथ की योजना में बाधा डाल सकता है, जिसे आईपीपीबी के चीफ एग्जिक्यूटिव और एमडी सुरेश सेठी ने तैयार किया है। सेठी आईपीपीबी को एक 'स्वतंत्र और नए जमाने का बैंक' मानते हैं, जिसका अपना स्टाफ, अपने नियम और अपनी अकाउंटिंग प्रैक्टिस है।'स्वतंत्र और नए जमाने का बैंक'
साफ है कि 165 साल पुराने इंडिया पोस्ट के मुख्यालय डाक भवन के टॉप अधिकारियों जैसी राय कर्मचारी संघों की नहीं है। यह असंतोष आईपीपीबी की ग्रोथ की योजना में बाधा डाल सकता है, जिसे आईपीपीबी के चीफ एग्जिक्यूटिव और एमडी सुरेश सेठी ने तैयार किया है। सेठी आईपीपीबी को एक 'स्वतंत्र और नए जमाने का बैंक' मानते हैं, जिसका अपना स्टाफ, अपने नियम और अपनी अकाउंटिंग प्रैक्टिस है।सिटीबैंक और वोडाफोन में काम कर चुके सेठी ने कहा, 'हम मेरिट आधारित संगठन बना रहे हैं।' सेठी यस बैंक की संस्थापक टीम में भी रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम एक कॉरपोरेट टीम बना रहे हैं, जिसमें केवल आईपीपीबी के अधिकारी होंगे। इंडिया पोस्ट हमें लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देगा। हम उनके पोस्टमैन नेटवर्क का ही उपयोग करेंगे।'
'आईपीपीबी में कारोबार की क्षमता'
मुंबई की कंसल्टेंसी अल्वारेज ऐंड मार्सल के एमडी भाविक हाथी इस बात से सहमत नजर आए। उन्होंने कहा, 'पेमेंट्स बैंक के जरिए कारोबार करने की क्षमता आईपीपीबी में है। इसने टेक्नॉलजी के लिहाज से अच्छा निवेश किया है। इसकी पहुंच काफी ज्यादा है।' उन्होंने कहा कि यह बैंकों के लिए लोन ओरिजिनेशन, छोटे कर्ज के वितरण, माइक्रो-इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड्स के मामले में मदद कर सकता है। पेमेंट्स बैंक डिपॉजिट लेने वाले संस्थान हैं। ये मुख्य तौर पपर कस्टमर्स से उनके सेलफोन के जरिए संपर्क करते हैं, न कि परंपरागत बैंक शाखाओं के जरिए।
पोस्टमैन को मिलेगा इंसेंटिव
हालांकि, आईपीपीबी का इरादा सरकार की ओर से प्रस्तावित 'सेलफोन बेस्ड बैंकिंग' के रास्ते पर चलने का नहीं है। इसके बजाय इंडिया पोस्ट के ग्रामीण डाक सेवक और डाकिये लोगों से संपर्क का जरिया बनेंगे। इस सेवा के बदले डाकियों को इंसेंटिव दिया जाएगा। खाता खोलने के लिए 20-25 रुपये और ट्रांजैक्शंस के लिए इससे कुछ कम रकम उन्हें दी जाएगी। आईपीपीबी ने 2,50,000 डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों को प्रशिक्षण दिया है और उनमें से करीब 20,000 को स्मार्टफोन और बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट रीडर दिए हैं।दूसरी ओर ऑल इंडिया पोस्टल एंप्लॉयीज यूनियन के प्रेजिडेंट वीरेंद्र शर्मा ने कहा, 'आधे समय तो आईपीपीबी का सर्वर डाउन रहता है। उनकी इंटरनेट कनेक्टिविटी खराब है। कभी-कभी तो एक अकाउंट खोलने में दो से तीन घंटे लग जाते हैं।' उन्होंने आईपीपीबी को एक बड़ा कदम बताया, लेकिन उनका यह भी कहना था कि डाकियों को पेमेंट्स बैंक शुरू करने से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
जनधन खातों से बेहतर है हमारा मामला
डोरस्टेप बैंकिंग मॉडल के जरिए आईपीपीबी को थर्ड पार्टी फाइनैंशल प्रॉडक्ट्स की बिक्री करने के अलावा, यूटिलिटी पेमेंट्स और मनी ट्रांसफर में मदद देने की उम्मीद है। वह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और सब्सिडी ट्रांसफर के लिए राज्य सरकारों की इजाजत लेने में अपने पैरेंट डिपार्टमेंट का सहारा भी ले रहा है।
सेठी ने कहा, 'सरकार जन धन खातों में पैसे भेजना चाहती है, लेकिन हमारा मामला जन धन खातों से बेहतर है, क्योंकि हम कस्टमर के पास जाकर ये सेवाएं देते हैं।' इसके अलावा आईपीपीबी को उम्मीद है कि वह 17 करोड़ इंडिया पोस्ट कस्टमर्स के पोस्टल सेविंग्स बैंक एकाउंट्स को 'डिजिटाइज' कर देगा, जिनका मैनेजमेंट रेग्युलर बैंकिंग सिस्टम के बाहर हो रहा है।
दरें ऊंची होना बड़ी परेशानी
पेमेंट्स बैंकों की एक बड़ी कमी यह है कि वे कर्ज नहीं दे सकते हैं। जो डिपॉजिट वे जुटाते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा गवर्नमेंट डेट में निवेश किया जाता है। इस नियम के कारण उन्हें ऊंची दरों पर डिपॉजिट जुटाने का दबाव झेलना पड़ता है। सेठी ने कहा, 'हमारी दरें मोटे तौर पर सेविंग्स बैंक रेट्स के साथ बेंचमार्क हैं, लेकिन दरें ऊंची होने भर से कस्टमर नहीं आते। सुविधा, सेवा और सुरक्षा का पहलू ज्यादा अहम है।'
आपका बैंकर बनने को तैयार है नए जमाने का पोस्टमैन
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Thursday, June 27, 2019
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